शीर्षक: जलो मत, भाई!
रामनगर नामक गाँव में रमा नाम की एक मेहनती महिला रहती थी। वह प्रतिदिन ताज़े फल और सब्जियाँ बेचकर अपना जीवनयापन करती थी। पूरे गाँव में लोग उसकी ईमानदारी और अच्छी गुणवत्ता के कारण उसी से फल और सब्जियाँ खरीदना पसंद करते थे। वह हमेशा ताज़ी और अच्छी वस्तुएँ उचित मूल्य पर बेचती थी। इसलिए उसका व्यापार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था।

एक दिन उसने अपने व्यापार को और बेहतर बनाने के लिए नया ठेला खरीदने का निर्णय लिया। अगले ही दिन उसने नया ठेला लिया और अपने सामान को पहले से अधिक सुंदर ढंग से सजाकर बेचना शुरू किया। उसका नया ठेला देखकर गाँव के लोग बहुत प्रभावित हुए और उसकी बिक्री पहले से भी अधिक बढ़ गई।

यह देखकर पास के गाँव में रहने वाले एक अन्य फल विक्रेता, पदुआ, को रमा से ईर्ष्या होने लगी। उसे लगा कि अब लोग उससे कम और रमा से अधिक सामान खरीदेंगे। उसकी बेचैनी देखकर रमा ने मुस्कुराते हुए कहा,
“भाई, चिंता मत करो। यदि तुम भी अपने ग्राहकों को ताज़ा और अच्छी गुणवत्ता का सामान दोगे, तो तुम्हारा व्यापार भी अवश्य बढ़ेगा।”

लेकिन पदुआ ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। उसने सोचा कि किसी तरह रमा का व्यापार कम किया जाए। इसी सोच में उसने रमा के ठेले में रात के समय कुछ खराब और सड़ी हुई सब्जियाँ रख दीं, ताकि अगले दिन लोग रमा पर भरोसा न करें।
अगली सुबह जब रमा अपना ठेला लगाने पहुँची, तो उसकी नज़र उन खराब सब्जियों पर पड़ी। उसने तुरंत उन्हें अलग कर दिया और ताज़ी सब्जियाँ सजाकर अपना व्यापार शुरू कर दिया। उसी समय उसने पदुआ को अपने ठेले के पास खड़ा देखा। रमा समझ गई कि यह उसी की शरारत थी, फिर भी उसने किसी से कुछ नहीं कहा।
कुछ ही दिनों बाद गाँव के लोगों ने पदुआ के ठेले से फल और सब्जियाँ खरीदना बंद कर दिया। कारण यह था कि वह अक्सर बासी और खराब सामान बेचने लगा था। तब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। वह रमा के पास गया, उससे क्षमा माँगी और अपने व्यवहार पर पछतावा व्यक्त किया।
रमा ने बड़े प्रेम से उसे क्षमा कर दिया और कहा,
“दूसरों से ईर्ष्या करने के बजाय यदि हम स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करें, तो सफलता अवश्य मिलती है।”
उस दिन के बाद दोनों अच्छे मित्र बन गए और ईमानदारी तथा मेहनत से अपना व्यापार करने लगे।
शिक्षा:
दूसरों की सफलता से जलने के बजाय हमें उनसे प्रेरणा लेकर स्वयं को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। ईमानदारी, मेहनत और अच्छे व्यवहार से ही सच्ची सफलता मिलती है।
